त्रिफला एक दुर्लभ पर बहुत ही गुणकारी व लाभकारी फार्मूलों में से एक है, जो शरीर को तो लाभ पहुंचाता है, साथ ही साथ वात, कफ और पित्त जैसे दोषों का रामबान इलाज है। त्रिफला तीन गुणकारी फलों (हरड, भरड व आवला) से बना चूर्ण है।
त्रिफला लेने की विधि व गुणः-
1 त्रिफला सुबह गुड के साथ तथा साय पश्चात गर्म दूध के साथ लेना लाभ दायक है।
2 रात में त्रिफला खाने से यह कब्ज को दूर करता ही है तथा साथ-साथ पेट भी अच्छे से साफ हो जाता है। पेट ही अधिकतम बिमारियों की जड है। पेट सही रहेगा तो बहुत सी बिमारियों भी हमसे दूर रहेगी।
3 त्रिफला पेट से साथ-साथ आखों की रोषनी बढानें की लिए भी कारगर है। त्रिफला चूर्ण को रात में भिगोकर रख दे तथा सुबह पतले कपडे से छान कर आखों धोने से आखों की रोषनी बढती है।
4 सुबह छाने हुए पानी से कुल्ला करने से दांत व मसुडे भी मजबूत होते है।
5 त्रिफला के काढ़े में शहद मिलाकर पीने से मोटापा भी कम होता है।
6 यह मधुमेह एवं मूत्र संबंधी विकारों में भी लाभकारी है।
7 त्रिफला एक एंटिसेप्टिक है, त्रिफला का काढा बनाकर पीने से चोट के घाव जल्दी भर जातें है।
8 सुबह त्रिफला लेने से यह शरीर में विटामिन, आयरन, कैलष्यिम इत्यादि कमी की पूर्ती करता है। अतः सुबह के समय त्रिफला का सेवन आवष्यक रूप से करना चाहिए।
मात्राः
2 से 4 ग्राम चूर्ण दोपहर को भोजन के बाद अथवा रात को गुनगुने पानी के साथ लें।
सावधानीःदुर्बल व्यक्ति, कृश व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री एवं बुखार में त्रिफला का सेवन नहीं करना चाहिए।
त्रिफला से उपयोग से लाभ
- एक वर्ष तक नियमित रुप से सेवन करने से शरीर चुस्त होता है।
- दो वर्ष तक नियमित रुप से सेवन करने से शरीर निरोगी हो जाता हैं।
- तीन वर्ष तक नियमित रुप से सेवन करने से नेत्र-ज्योति बढ जाती है।
- चार वर्ष तक नियमित रुप से सेवन करने से त्वचा कोमल व सुंदर हो जाती है।
- पांच वर्ष तक नियमित रुप से सेवन करने से बुद्धि का विकास होकर कुशाग्र हो जाती है।
- छः वर्ष तक नियमित रुप से सेवन करने से शरीर शक्ति में पर्याप्त वृद्धि होती है।
- सात वर्ष तक नियमित रुप से सेवन करने से बाल फिर से सफ़ेद से काले हो जाते हैं।
- आठ वर्ष तक नियमित रुप से सेवन करने से वृद्धाव्स्था से पुनरू योवन लोट आता है।
- नौ वर्ष तक नियमित रुप से सेवन करने से नेत्र-ज्योति कुशाग्र हो जाती है और सूक्ष्म से सूक्ष्म वस्तु भी आसानी से दिखाई देने लगती हैं।

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