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कामकाजी महिलाओं की बढ़ती समस्याएं

 कामकाजी महिलाओं की बढ़ती समस्याएं





किसी भी राष्ट्र की उन्नति व अवनति का मुख्य कारण महिलाएं ही हैं जहां नारी शिक्षित व जागरूक  होगी वही देश  उन्नत होगा । यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता । स्त्रियों का आदर होता है, वहां देवता रमण करते हैं । जहां स्त्रियों का आदर नहीं होता वहां सब काम निष्फल हो जाता है। 

जहां नारी पूरी लगन से अपने कार्य क्षेत्र में कार्य करके और घर पर अपने बच्चों को संभालना, घर को देखना ,यह सारे कार्य बड़ी लगन से करती है ताकि उसके बच्चे वह परिवार और आगे बढ़ सके ।हमें हर क्षेत्र में महिला का योगदान दिखाई देता है उनके बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। 

 आज के युग में जो मान सम्मान महिलाओं को मिलना चाहिए वह उन्हें नहीं मिल पा रहा है। उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है । एक कामकाजी महिला की मुख्य समस्या उनका संघर्ष है उन्हें बाहर व अंदर तालमेल बिठाकर संघर्ष करना पड़ता है। भारतीय कामकाजी महिला की स्थिति चक्की के दो पाटों में फंसे घुन के समान हो गई है उन्हें बाहर व अंदर सभी कामों को देखना पड़ता है और घर में  व बाहर काम करने के कारण वह तनावग्रस्त हो जाती है पर परिवार में अहम भूमिका निभाने के कारण उनको सब कुछ संभालना ही पड़ता है इस कारण उसे मानसिक व शारीरिक थकान होती है । अधिक काम के दबाव के कारण उनको घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है  महिलाओं को भावात्मक दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है 

रितु करिधल , जिन्हें "भारत की रॉकेट महिला" कहा जाता है, इन्होंने चद्रंयान-3 मिशन  को लीड किया और भारत का नाम गौरवान्वित कर दिया । कल्पना चावला, साइना नेहवाल पी वी सिंधु , मेरी कॉम,झूलन गोस्वामी (क्रिकेटर),जमुना बोरो (मुक्केबाज),अंजू बाॅबी जाॅर्ज (लंबी कूद), हिमा दास (रेसर) ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जिन्होंने हमारे देश का नाम अमर  किया उन्होंने अपने निजी जिंदगी के साथ-साथ अपने कार्य क्षेत्रको बहुत अच्छे से संभाला।

 अत्यधिक काम के दबाव के कारण  चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन थकान ,अत्याधिक रक्तचाप आदि समस्याएं सामने आ रही है जिस  प्रकार ट्रेन के पहिए बड़ा या छोटा नहीं होता  उसी प्रकार घर में अगर पुरुष अपने को एक पहिया व महिला को दूसरा पहिया  समझ ले तो उनकी घर की गाड़ी सही मंजिल तक पहुंच जाएगी पुरुष को चाहिए कि महिला को समान अधिकार देकर उनके घर के कामकाज में सहायता करें ताकि महिलाओं को मानसिक व शारीरिक समस्या ना हो । भगवान श्री कृष्ण अपने से पहले राधा नाम को रखा और भगवान श्री राम ने अपने से पहले माता सीता का नाम रखा तभी तो हम सीताराम राधे कृष्ण बोलते हैं जब भगवान ने ही नारी को इतना सम्मान दिया तो हमें भी नारी को सम्मान देना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ाने की पुरजोर कोशिश करनी चाहिए

       

                                              वंदना अग्रवाल 

                                              प्रेरक

          

 


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