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जलने से बचाव के प्राथमिक उपचार/ First Aid Treatment in Burn

  जलने से बचाव के प्राथमिक उपचार/ First Aid Treatment in Burn







Burn:Symptoms and Treatment

गर्म तेल, पानी, दूध अथवा चाय के गिरने या आग की लपटों के पास खड़े होने आदि कारणों से, शरीर की त्वचा जलती तो नहीं है लेकिन लाल जरूर पड़ जाती है। ऐसी स्थिति को झुलसना कहते हैं। झुलस जाने पर कभी-कभी त्वचा पर छाले भी पड़ जाते हैं। जिसके कारण त्वचा भी नष्ट हो जाती है तथा गहरे तन्तुवर्ग को हानि भी पहुंचती है।

जलने तथा झुलसने से बचाव

1.कपड़ों में आग लगना- अगर शरीर के कपड़ों में आग लग जाए तो न तो दौड़ना चाहिए और न खड़े ही रहना चाहिए। खड़े रहने से आग की लपटे ऊपर की ओर उठकर मुंह, आंख और सिर को जला सकती है। ऐसी स्थिति में जलने वाले व्यक्ति को तुरंत ही जमी पर लेट जाना चाहिए तथा अपनी आंख, नाक तथा मुंह को दोनों हथेलियों से ढककर खूब लोट लेनी चाहिए। इससे आग के जल्दी बुझने में मदद मिलती है।
         सहायक व्यक्तियों को चाहिए कि जिस व्यक्ति के कपड़ों में आग लगी हो, उसके शरीर के ऊपर कम्बल, या जो भी मोटा तथा भारी कपड़ा उपलब्ध हो- डाल दें। इससे बाहरी हवा नहीं लगेगी और लगी हुई आग के जल्दी बुझ जाने की सम्भावना रहेगी।
         कम्बल आदि डालने के बाद कपड़ों में आग लगे हुए व्यक्ति को जमीन पर लिटाकर, उसके शरीर को कम्बल आदि से अच्छी तरह कसकर लपेट लेना चाहिए, ताकि आग जल्दी बुझ जाए।

आग में घिर जाना- किसी कारणवश मकान आदि में आग लग जाने पर अगर कोई व्यक्ति गिर गया हो तो उसे चाहिए कि वह पहले दीवार से सटकर पेट के बल लेट जाए, फिर फर्श से सटकर धीरे-धीरे रेंगते हुए दरवाजे या सीढ़ियों को ओर बढ़ते हुए आगे वाली जगह से बाहर निकल जाए।
 यदि कोई मकान की ऊपरी मंजिल में आग में घिर गया हो तो खिड़की आदि के रास्ते से नीचे लटककर अथवा कूद कर निकला जा सकता है। ऐसे अवसरों पर जहरीली गैसों से बचने के लिए अपनी नाक तथा मुंह पर गीला कपड़ा या रूमाल बांध लेना चाहिए।              
         यदि कोई व्यक्ति आग में घिर गया हो और स्वयं बच निकलने में असमर्थ हो तो उस स्थिति में जो लोग आग में घिरे हुए व्यक्ति को बचाने के जाएं, उन्हें अपनी नाक तथा मुंह पर गीला कपड़ा अथवा रूमाल बांध लेना चाहिए, ताकि उनका जहरीली गैसों से बचाव हो सकें। इसके बाद उन्हें रेंगते हुए ही उस स्थान पर पहुंचना चाहिए, जहां आग से घिरा हुआ असमर्थ व्यक्ति हो।

आग को बुझाना- जहां आग लगी हो, वहां से उन बची हुई वस्तुओं को, जिनमें आग लग जाने की संभावना हो- हटा देना चाहिए। इसके बाद आग को बुझाने की कोशिश करनी चाहिए।8र नाक पर गीला रूमाल बांध लेना चाहिए, ताकि जहरीली गैसों का प्रभाव न पड़े।

प्राथमिक उपचार-
1.जले हुए स्थान पर आलू या आलू का छिलका लगाकर रखने से भी जलन से राहत मिलेगी और ठंडक मिलेगी।

2.दो बूंद कार्बोलिक एसिड को एक छोटे चम्मच वैसलीन में डालें। अगर वैसलीन न मिले तो उसे उबले हुए नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से भी जलन शान्त होती है।

3.कार्बोलिक लोशन या सोड़ा घुले हुए गर्म पानी में कपड़ा भिगोकर इसे जले हुए स्थान पर रखें। बोरिक एसिड या नमकीन पानी में कपड़े के टुकड़ों को भिगोकर रखना भी अच्छा रहता है।







4.गाढ़ी चाय बनाकर उसे ठंडी हो जाने पर छानकर जले हुए अंग पर लगाने से भी आराम मिलता है।

5.जले हुए हिस्से पर तुलसी के पत्तों का रस लगाना भी बेहद असरकारक होता है।

6.अगर जलने के कारण शरीर की त्वचा पर कपड़ा चिपक गया हो तो सबसे पहले उसे अलग करने की कोशिश करना चाहिए। जले हुए स्थान पर से कपड़ा उतारने में मुश्किल पड़ती है, इसलिए पहले उस भाग के चारों ओर के कपड़ों को काट देना चाहिए। इसके बाद जले हुए भाग पर चिपके हुए कपड़े को नारियल या तिल के तेल से भिगोकर आसानी से हटाया जा सकता है।

7.जलने के बाद पीड़ित व्यक्ति के दिल पर बड़ा शॉक लगता है, इसलिए इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को सांत्वना देनी चाहिए और उसकी हानि को भी बहुत कम रूप में प्रकट करना चाहिए। शॉक को दूर करने के लिए पीड़ित व्यक्ति को दूध पिलाना चाहिए। अगर शॉक ज्यादा हो तो पीड़ित व्यक्ति को थोड़ी सी ब्राण्डी भी दी जा सकती है।

8.पीड़ित व्यक्ति के शरीर को कम्बल तथा कपड़ों से ढककर गर्म रखना चाहिए। इसके लिए जरूरत अनुसार गर्म पानी की बोतलों का प्रयोग भी किया जा सकता है।


9. जलने पर तुरंत पानी में नमक डालकर गाढ़ा घोल बनाएं, और प्रभावित स्थान पर लगाएं, इससे ठंडक भी मिलेगी और त्वचा फफोले भी नहीं पड़ेंगे।

10.यदि पीड़ित व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो उसे होश में लाने की कोशिश करनी चाहिए और अगर उसे सांस लेने में परेशानी हो रही हो तो उसे कृत्रिम सांस दी जा सकती है।

11.पीड़ित के शरीर के जले हुए भाग पर छाले उठने से पहले ही लगातार ठंडा पानी डालने या उसे ठंडे पानी में डुबोए रखने अथवा उस पर किसी मोटे तथा मुलायम कपड़े की गद्दी को ठंडे पानी में भिगोकर रखने से जलन शांत हो जाती है लेकिन यह उपचार तभी लाभ करता है, जब छाले न पड़े हों।

12.गर्म पानी, चाय या दूध आदि के गिर जाने से अगर त्वचा पर छाले पड़ गए हों तो उन्हें फोड़ना नहीं चाहिए। बल्कि उन पर बोरिक एसिड छिड़ककर साफ कपड़े की पट्टी बांध देनी चाहिए।

13.जले हुए अंग पर तिल का तेल, जैतून का तेल या नारियल का तेल लगाने से ठंडक पहुंचती है तथा जलन के कारण होने वाला दर्द कम हो जाता है।

 14.पके बेल का गूदा जले पर लगा दें। जलन शान्त हो जायेगी, फफोला नहीं पड़ेगा।

15.जीरा पानी में पीसकर लेप करने से जलन शान्त होती है।

16. यदि जलने से फफोले पड़ गये हों तो आक के पत्तों का रस फफोलों पर लगायें फफोले बैठ जायेंगे।

17. मुल्तानी मिट्टी (गाचनी) को बारीक कूटकर दही में मिलाकर जले पर लेप कर दें।

18.आग से जलने पर दानेदार मेथी को पानी में पीसकर लेप करने से जलन दूर होती हैं। फफोले नहीं पड़ते।

19.जले हुए स्थान पर तुरंत हल्दी का पानी लगाने से दर्द कम होता है और आराम मिलता है। इसलिए इसे प्राथमिक उपाचार के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है

2o.जल जाने पर टूथपेस्ट भी एक कारगर उपचार है जिससे जलन तो कम होती ही है, साथ ही त्वचा पर फफोले भी नहीं पड़ते।

21.अधिक गर्म दूध या चाय आदि पीने से अगर जीभ या गला जल जाए तो पीड़ित व्यक्ति के शरीर को कपड़ों में अच्छी तरह लपेटकर बैठा दें। फिर गर्म पानी में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़े हुए कपड़े के टुकड़ों को गले की त्वचा पर रखकर सेंक पहुंचाए। अगर बर्फ हो तो उसके टुकड़े रोगी को निरन्तर चुसाने चाहिए अथवा खूब ठंड़ा पानी करके पिलाना चाहिए।

22.जलने के कारण अगर शरीर पर घाव हो गया हो और रोगी को डाक्टरी चिकित्सा जल्द उपलब्ध न हो पाए तो उसगके जले हुए अंग पर पूर्वोक्त वस्तुओं का लेप करने के बाद पट्टी बांध देनी चाहिए, ताकि वह जला हुआ अंग बाहरी गदंगी, धूल तथा कीटाणुओं से सुरक्षित रहे।
प्राथमिक उपचारों के बाद पीड़ित व्यक्ति को जल्द से जल्द डाक्टर के पास ले जाना चाहिए।

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