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गर्भावस्था में देखभाल और सावधानियां/Care In Pregnancy





 हर माँ चाहती है  कि वह एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे।  शिशु का विकास माता के आहार पर निर्भर होता है। 
Food and Nutrition Board के अनुसार  को आहार के माधयम से 300 calories अतिरिक्त गर्भवती महिला कोमिलनी ही चाहिए। यानि सामान्य महिला कि अपेक्षा गर्भवती महिला को 2400 calories प्राप्त हो इतना आहार लेना चाहिए और विविध Vitamins, Minerals अधिक मात्रा में प्राप्त करना चाहिए।


हाई रिस्क प्रेग्नेंसी 

high risk pregnancy  – हाई रिस्क प्रेग्नेंसी अर्थात गर्भावस्था के दौरान पैदा हो सकने वाला संभावित अत्यधिक खतरा ।जो महिलाएं गर्भवती है  उनके लिए कुछ आवश्यक कदम उठा पायें ।हम आपसे इस बारे में जानकारी शेयर कर रहे है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की नौबत कब और कैसे तथा किन हालत में आ सकती है ।

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के कारण:-

1.अगर प्रेग्नेंट महिला की उम्र अठारह वर्ष से कम है।
2.प्रेग्नेंट महिला की उम्र 35-40 के बीच है ।
3. गर्भवती महिला मोटापे की शिकार है। 
4. गर्भवती महिला एनिमियां यानि की खून की कमी की समस्या हो तो  जरुरी पोषक तत्वों की शरीर में कमी हो जाती है 
5. गर्भवती महिला जिसका एक से अधिक बार गर्भपात हो चुका हो।
6.गर्भ में एक से अधिक शिशु हो या फिर अगर शिशु का वजन निर्धारित वजन से कम हो।
7.गर्भ में अगर विपरीत लिंग वाले बच्चे एक साथ पल रहे हो या जुड़वाँ बच्चे हो ।
8.मधुमेह ,उच्चरक्तचाप ,टीबी ,पीलिया  आदि रोग से ग्रस्त होने पर ।


हाई रिस्क प्रेग्नेंसी से बचाव –

.1. डॉक्टर की देख रेख में कुछ खास तरह के टेस्ट नियमित रूप से करवाते रहना चाहिए।
2. गर्भवती महिला को लाल साग ,पालक का साग और फलों का भरपूर मात्र में सेवन करना चाहिए ।
3.आलस को छोड़कर active बने रहना चाहिए ताकि शरीर में मूवमेंट सही से होती रहे।
4. कुछ हलके फुल्के व्यायाम जो गर्भावस्था के दौरान किये जा सकते है करते रहना चाहिए ।




गर्भावस्था में उपयोगी जूस

डॉक्टर हमे जूस (juice) के सेवन की सलाह देता है ऐसा इसलिए होता है कि खाने के मुकाबले जूस (juice) एक तो आसानी से पच जाता है और दूसरा बहुत सारे पोषक तत्वों की भी आपूर्ति हमारे शरीर में अच्छे से हो जाती है इसलिए यह एक पूरक आहार की तरह काम करता है ।इसलिए जो लोग अपनी सेहत के लिए थोडा बेहतर सोचते है उन्हें जूस (juice) को भी अपने आहार में नियमित शामिल करना चाहिए ।

1.ऐसी कई प्रकार की सब्जियां हैं जिनका जूस आप बना कर पी सकते हैं। सब्जियां जैसे, पालक, ब्रॉकली, धनिया, खीरा ।
2.इस हरी सब्जी में लोहा, प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, क्रोमियम, विटामिन ए और सी पाया जाता है। 
3.यह शरीर का मैटाबॉलिज्म बढाती है और शरीर से गंदगी को बाहर निकालती है। साथ में यह खून की कमी को भी पूरा करती है।
4.विटामिन सी की अधिक मात्रा होने के कारण, संतरे के सेवन से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है ।
5.लौकी  एक  बहुत  ही  फायदेमंद  सब्जी  हैं,  जिसमे  भरपूर  मात्रा  में  पानी  और  पोषक  तत्व  पाए  जाते  हैं।


गर्भावस्था में उपयोगी जूस Pregnancy Juice

.1


हरे अंगूर-25 से 30
खीरा-1
हरा सेब-1
1चम्मच नीबू का रस

इन सभी चीजों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर ग्राइंडर में जूस बनायें।
 Vitamin K की कमी को पूरा करता है। विटामिन K शरीर में खून, कोशिकाओं, हड्डियों और मांशपेशियों को स्वस्थ रखता है।
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.2



सेब-1
नारगी-1
चेरी-2

इन तीनों फलों को अच्छे से ग्राइंडर में डाल कर जूस बनायें और पियें।

1.इसके फायदे: यह एक ऐसा जूस है जो विटामिन और मिनरल्स से पूर्ण है। 
2. इससे शरीर में Vitamin A, B, C, E की कमी दूर होगी और ।
3. विटामिन A मुख्य तरीके से आँख, हृदय, फेफड़े और गुर्दे को स्वस्थ रखता है।


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 3




अदरक - छोटा टुकडा
चुकंदर-1/2 
गाजर-5 से 6
सेब-1

इन सभी सामग्रियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर ग्राइंड करें और जूस बना कर पियें।
1.इस जूस में फाइबर की मात्र भरपूर होती है।
2.अदरक आपको पेट के दर्द, उल्टी, दस्त से दूर रखता है।



 गर्भावस्था में उल्टी ज्यादा होने पर


 गर्भवस्था में थोड़ा बहुत जी मिचलाना या उल्टी हो जाना सामान्य होता है। इसके लिए किसी विशेष उपचार की जरूरत नहीं होती। खाने पीने में और रहन सहन में थोड़ा बदलाव लाने से इनमे आराम मिलता है । 
ये मिचली या उल्टी की समस्या कई बार इतनी अधिक हो जाती है कि महिलाओं को कमजोरी तक हो जाती है  इसे नजरअंदाज ना करें और इसका इलाज करें। फिलहाल अगर किसी डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं तो इन घरेलू नुस्खों से मिचली या मॉर्निंग सिकनेस से छुटकारा पाएं।   

1.अदरक की चाय- गर्भावस्था में चाय पीना खासरक अदरक वाली नुकसानदायक होती है। लेकिन अगर मिचली खत्म नहीं हो रही है तो थोड़ी सी अदरक की चाय पिएं। 

2.नींबू का जूस- नींबू का जूस मार्निग सिकनेस की समस्या को दूर करने में काफी सहायक है। पानी ,नींबू का रस और पुदीने का मिश्रण लेने से मार्निंग सिकनेस का इलाज मुमकिन है।

3.पौष्टिक आहार- स्वस्थ आहार से मार्निग सिकनेस का बाहतर इलाज होता है। थोड़ी थोड़ी देर पर खाना खाने से भी मार्निग सिकनेस का इलाज हो सकता है।

 4. थोड़ो-थोड़ा ही खाना खाएं। ज्यादा खाना एक साथ ना खाएं। 

5.चटपचा खाना- तला हुआ खाना ना लेकर मार्निग सिकनेस से बचें।

6.गर्भावस्था में  अंग्रेजी दवा लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछ लें। जब तक ज्यादा जरूरत ना हो दवा ना लें।

 7. सुबह उठते समय झटके से ना उठे। सहारा लेकर धीरे से उठें। दो मिनट बैठे रहें फिर खड़े होना चाहिए।

8.खाली पेट बिल्कुल ना रहें। थोड़ा बहुत खाते रहने से इस परेशानी में कमी ही आती है।

 9. थकान हो जाये इतना काम न करें। थकान होने पर उल्टी और जी घबराना बढ़ सकता है।

 10.पानी पर्याप्त मात्रा में पियें।

 11. कोल्ड ड्रिंक , शराब आदि नुकसान करने वाले ठन्डे पेय ना लें।

 12. गर्भावस्था  के समय आयरन की गोलियां  शुरू करनी पड़ती है । 


13. पेट साफ होने से जी मिचलाना कम होता है।

 14.  उल्टी होने के बाद थोड़ा सा नमक अंगुली में लेकर दांतों  पर हल्का सा रगड़ कर कुल्ला कर लेना चाहिए।

 15.नींबू को काटकर बीज निकाल दें। कटे हुए नींबू पर थोड़ा सेंधा नमक और काली मिर्च पाउडर डालकर चूसने से उल्टी और जी मिचलाना कम हो जाता है।

 16. संतरा और अनार खाने से उल्टी में आराम मिलता है।

 17.नारियल पानी पीने से फायदा मिलता है। 





गर्भावस्‍था मे क्‍या न करें 




1)भारी वज़न ना उठाएं ।

2)  बहुत देर तक एक साथ ना खड़े रहे।

3) सीढ़ियों का प्रयोग कम से कम करें।

4) हील वाली सैंडल या चप्पल ना पहनें.  हमेशा flat चप्पल ही पहनें।

5) बाहरी खाना ना लें, खासतौर पे junk foods आदि।

6) तला और मसालेदार न खाएं, इनसे गैस , acidity , जलन हो सकती है।

7) Pregnancy के दौरान बिना अपनी gynecologist  की सलाह के दवाओं का सेवन ना करें.  यहाँ तक कि छोटी -मोटी बीमारियों के लिए भी अपने से दावा ना लें.

8)  प्रेगनेंसी के दौरान कम से कम यात्रा करें.।


11) इस दौरान तंग कपडे ना पहने.


14) बाथरूम में खड़े होकर ना नहाएं, और इस बात की पुष्टि करें की काई-वगैरह जमने से फिसलने का खतरा ना हो.

15) Pregnancy के दौरान smoking कत्तई ना करें, और smoking से भी बच्चे को खतरा हो सकता है.

16) कैफीन का सेवन avoid करें।


17) बिना डाक्टरी सलाह के कोई व्यायाम ना करें.

18) कम ना खाएं. आप usually जितना खाती हैं उससे अधिक खाएं. आमतौर पर एक शिशु को 300 कैलोरी की आवश्यकता होती है,

19) प्यासे ना रहे. समय समय पर पानी पीते रहे।

20) पेट के बल ना सोएं.

21) गर्भावस्था के दौरान X-Ray से दूर रहे।


क्या खाये गर्भावस्था मे :-


1.Calcium युक्त आहार में दूध और दूध से बने व्यंजन, दलहन, मक्खन, चीज, मेथी, बीट, अंजीर, अंगूर, तरबूज, तिल, उड़द, बाजऱा, मांस आदि का समावेश होता है। 

2.Folic Acid युक्त आहार मे दाल, राजमा, पालक, मटर, मक्का, हरी सरसो, भिंड़ी, सोयाबीन, काबुली चना, स्ट्रॉबेरी, केला, अननस, संतरा, दलीया, साबुत अनाज का आटा, आटे कि ब्रेड आदि का समावेश होता है।  

3.अधिकाधिक मात्रा मे calories तथा उचित मात्रा में Proteins के साथ Vitamins की जरुरत की पूर्ति कर सके। 

4.गर्भवती महिला को हर 4 घंटे में कुछ खाने की कोशिश करनी चाहिए। हो सकता है आपको भूख न लगी हो, परन्तु हो सकता है कि आपका गर्भस्थ शिशु भूखा हो। 


5.Anaemia से बचने के लिए अखण्ड अनाज से बने पदार्थ, अंकुरित दलहन, हरे पत्तेवाली साग भाज़ी, ग़ुड़, तिल आदि लोहतत्व से भरपूर खाद्यपदार्थों का सेवन करना चाहिए। 

6.सम्पूर्ण गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला का वजन 10 से 12 किलो बढ़ना चाहिए।  

7.गर्भवती महिला को उपवास नहीं करना चाहिए। 

8.गर्भवती महिला को मीठा खाने की इच्छा हो तो उन्हें अंजीर खाना चाहिए। इसमें प्रचुर मात्रा में Calcium है और इससे कब्ज भी दूर होता हैं। 

9.Vegetable सूप और जूस लेना चाहिए। भोजन के दौरान इनका सेवन करे। 

10.अपने डॉक्टर की सलाह अनुसार Vitamin और Iron कि गोलिया नियमित समय पर लेना चाहिए।

11.अंतिम 6 महीनो के दौरान करीब 1 किलोग्राम Proteins की आवश्यकता होती है। 











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